maretha maathugalu
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20 March 2010
कुछ दूर दूर से...
जो कभी कहा नहीं था,
हमने अपनी जबांसे/
उस बात की नमी,
अपनी आन्कोमे चुप के से जलक रही है//
बेशक ये वही तड़प की सन्स है,
कभी न थमने वाली कायलों की बरसात है/
कभी न बुज्नेदो इस प्यास को,
जालिम मोहोब्बत के नशे की...एहसास को//
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